भगवान दिखाता हैं !! The Divine appears
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भगवान दिखाता हैं !! The Divine appears
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प्रभु जी : अब उससे आगे का भी बात करेंगे और हम लोग क्यों भटक गए वो भी बात करेंगे। ठीक है?
भैया जी : ठीक ।
प्रभु जी : असल में ये दुनिया जैसे बनाई है ज्ञानी ने जब पहले बनाई थी तो बहुत अच्छी थी। ऐसे थी कि जैसे संसार में हम मंदिर में पूजा करते हैं। वहां पर भी हम जैसे भगवान को समझते हैं उसी हिसाब से वहां पर पूजा करते थे। उसी पूजा से ही भगवान के दर्शन तक पहुंच सकते थे हम लोग। लेकिन जो बीच में ज्ञानी लोग आए उसको ये प्राकृतिक स्वरूप का अवस्था होता है। उस अवस्था को गोलमाल कर दिया। जैसे ज्ञान तक क्या है? प्रकृति है। ज्ञान भी आपको - जैसे आज राजेश भैया को घटित हुआ कि मैं ऐसे धैर्य में ठहर कर देखा तो ब्रह्मा आ के मुझे इन देने लगी। वो ब्रह्मचारी हो गए। मतलब ब्रह्मचार्य का अर्थ है उनको ज्ञान हो गया। अब वो ज्ञानी हो गए। अब वो ज्ञान कहां हुआ? उनके बॉडी में हुआ। और उस बॉडी में होने के बाद उसकी मन से वो समझ पाया वो ज्ञान है। अब ये ज्ञान तक भी तो हम मंदिर को पूजा करके जा सकते थे। हम इसमें तो हम तो अब ये जिसको ये ज्ञान हुआ अब वो बनने लगे भगवान। और हम सब लोग वही भगवान है बोल के शरीर को भगवान मान के जब पूजे तो अगले वाला भगवान को समझ ही नहीं पाया। हम जिसको ये अनुभव हुआ अब वो ब्रह्मा विष्णु महेश तो हो गया समझ आ गया उसको ब्रह्मा विराट स्वरूप है तो हमारा बॉडी है| विष्णु जो है वो विचार आता है महेश जो जो विचार आता है वही तो करते हैं अब करने के बाद महेश हुआ किया अब किया हुआ तो अगले के लिए फिर वो होगा वो करते समय पता ही नहीं चलता महेश को है ना वो जड़न होता है| जो विचार आया था वो करते हैं ना तो थोड़ी देर प्रेजेंट में ही होते हैं। प्रेजेंट में होता है महेश सिर्फ प्रेजेंट में। अब प्रेजेंट में तो होते नहीं हम और इसीलिए हम वो महेश को पकड़ नहीं पाते। जब ये ब्रह्मा विष्णु महेश भी पकड़ में आया तब भी तो पुकारने के लिए जाते हैं ना शिव के सामने तो दर्शन के लिए भगवान अब दर्शन दो हम है ना अब ये चीज के लिए क्या हुआ इस संसार में जैसे अभी हमारे बहुत अच्छे कह रहे थे राहुल जी भी अब ऐसे ऐसे ज्ञान देने और ऐसे बताने वाले वो जैसे अब मैं दे रहा हूं आप लोग को ज्ञान टिमबर गीता भगवान भी है ना अब मेरे शरीर को भगवान माने तो भैया फस गए हम है ना हां मैं वो बात बताने वाला हूं हम कि उनका बात बता सकता हूं जैसे अभी राहुल भैया ने बताया वो एक एंगल से है जैसे उसके अध्यात्म और उनकी सत्संगत है ना जैसे जिस तरीका से एंगल से होता है उसी एंगल में उन लोग समझ पाते हैं और उसी एंगल
भैया जी : हां जी।
प्रभु जी : हैं हम ऐसी बहुत एंगल होती है एंगल तो बहुत ही एंगल होती है ऐसा नहीं अभी जितने धरती में इतना भी नहीं बहुत अनगिनती एंगल होती है। है ना? हर एंगल से हम समझा पाते हैं जिसने उसको देखा है। है ना? जब आपने देखा है तब तो इधर से भी बता पाओगी। उधर से भी बता पाओगे। जैसे भारत की मैप आपने देखा।
भैया जी : जी भैया जी
प्रभु जी : की इधर इधर से। नहीं अब भारत की मैप ही नहीं दिखी हो आपको। बस भारत पता है। अब उसकी न बता पाओगे। एक एंगल से भी नहीं मिला। है ना समझ रहे हो मादा भैया कुछ समझ में आया ये बात
भैया जी : जी
प्रभु जी : है ना क्यों वहां पर भगवान बन गए अब उस अवस्था बॉडी को भी लगता है कि हां मैं ही भगवान हूं| राम भी तो आए थे ना शरीर में तो मैं भी उसी तरीका से शरीर का भगवान हूं| हम भी तो राम ही को पूजा करते हैं ना बोलते है ना जी अब राम का कहानी रामायण कितने भाग में लिखा गया है। महाभारत की कहानी, गीता कितने पीछे लिखे गया है। बुद्ध की कितने पीछे लिखे गया है। अब वो तो आप लोग के जैसे बताने के लिए वो जरिया अच्छा है इसलिए लेकिन बीच में ये सारे ज्ञान को भी अविद्या में ग्रसित कर लिया तो असली ज्ञान के बाद जो दर्शन है वहां तक अभी नहीं कोई समझ ही नहीं पा रहे है उसको तो इनको लगता भी नहीं है कि भगवान दिखते भी है क्या नहीं कहा दिखते हैं बोलते हैं अब किसी ने भगवान ही नहीं देखा तो कैसे कहा कि भगवान है ब्रह्म सारे विराट स्वरूप है एक है इसके बाद भी सिद्ध है तो फिर कैसे नामकरण हुआ बिना देखे तो होता नहीं है वो देखे हैं किसी ने तो देखने के बाद समझ आता है उससे आगे जितना भी समझ आया समझो देखने से पहले वही है भारत का नक्शा दिखा नहीं है लेकिन भारत नाम पता है इतना ही होता है जितना भी ज्ञानी जितना भी ब्रह्म ज्ञानी सा के भी भगवान के साथ एकाकार भी हो जब आगे आके ना दिखाए अपने असली कि वो सच में कैसा है। है ना? अब वो जाने का रास्ता वही ब्रह्मचारी साधना है। उसी का वो अपना अहंकार गिर जाएगा। मैं नहीं रहूंगा तो फिर वही आएगा। वही बताएगा वैसे वैसे बताते बताते आपका बॉडी लायक होगा। कोशिका कोशिका तैयार होगा। उस दर्शन पाने के लिए भी जैसे छोटा मोटा नहीं ना फिर वो बॉडी भी तैयार होनी पड़ती है। कोशिका कोशिका वो ब्रह्मचारी खुद तैयार करेगा। और ब्रह्मचारी का जो प्रकृति घटती घटती जाती है वही से ही उसका कोशिका रेडी रेडी रेडी रेडी होते होते होते जाते, बाद में जब वो लायक होगा, तो वो दर्शन देगा इस तरीके से होता है|