ब्रह्मनाड़ी
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ब्रह्मनाड़ी
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प्रभु जी : हम प्रणाम
अखिलेश भैया : प्रणाम प्रणाम प्रभु जी
प्रभु जी : और इसमें दो तीन बात और ऐड कर देता हूं मैं ठीक है सुन लीजिए ये जब भी ये सुष्मुना नाड़ी जो इंगला पीड़ा नाड़ी के बाद सुष्मना नाड़ी एक्टिव होते हैं तो सुष्मना नाड़ी एक्टिव हुआ वो खुद को पता चलता है ठीक है वो कैसे पता चलता है जैसे ना कि हमारी स्वास पर स्वास जो है अगर आप लेते हुए तो दोनों नाक से श्वास जाती है और आपको लगेगा कि दोनों नाक से जाकर भी वो तीसरा और नाली है।
अखिलेश भैया : जी जी जी जी महसूस करनी पड़ेगी वो जैसे अपने जैसे मैंने दोनों नाक मैं ऐसा महसूस करूंगा कि उन दोनों नाक के
प्रभु जी : बीच में भी एक ऐसी नली है जिस नली से वो सांस अंदर की तरफ जा रही है। हां दोनों नाक से लेके वो तीसरा नाक मतलब नली में वो प्रवाह हो रहा है। अब उस दशा में होता क्या है? इसको बोलता है सुष्म नाड़ी एक्टिव ब्रह्म नाड़ी एक्टिव अब इस दशा में आप डायरेक्ट ब्रह्म से कनेक्ट होते हो तो बोलते हैं ना लोग कभी कभी जीभ में आके सरस्वती वास करती है ये सुनिए हो कभी जीभ में आके सरस्वती तभी वास करती है जब आपका सूक्ष्म नाड़ी एक्टिव होता है उस टाइम टोटली आपका सरस्वती वास करती है और आप ब्रह्म स्वरूप होते हो अब ब्रह्म स्वरूप भी ब्रह्म का स्वरूप भी ऐसा है कि फिर आपकी चेतना की स्तर की अवस्था से ब्रह्मा एक्टिव होती है। अब बात समझो जी समझ में आया?
अखिलेश भैया : जी जी चेतना के अनुभव में पता चलता है। जी जी और हम खुद अपनी आवश्यकता पर हम सुष्मना नाड़ी एक्टिव भी कर सकते हैं। जी जी जी है ना? अब सुष्मना नाड़ी एक्टिव होने का अर्थ है अब उसका ब्रह्मा तक पहुंच गया बात
प्रभु जी : अब ब्रह्मा उस ब्रह्म तक पहुंचेगा जिस ब्रह्म तक उसका चेतना है जी वहां पे आके सब मतलब मतलब ये कह सकते हैं कि वो जीव जो है ब्रह्म के पास तक पहुंच गया है अगर उसकी सुष्मना नाड़ी एक्टिव हो गई है हां ब्रह्म तक पहुंच गया लेकिन ब्रह्म का भी स्तर बात समझो भैया क्योंकि हर लोग एक स्तर की तरह से डिसीजन करते हैं ना तो आप किस स्तर की ब्रह्म में पहुंचे हो तो उस स्तर से आपका सुष्म नाड़ी काम करता है।
अखिलेश भैया : जी जी जी और जो प्रकृति स्वरूप देना पड़ता है सुष्म नाड़ी कभी कभी आपको बे चेतना होकर भी वो
प्रभु जी : बड़ा वाला ब्रह्म का फिर आदेश देता है और आपसे काम करवाता है। अब ब्रह्म आपको कैसे आदेश करता है और आपसे कैसे काम लौटता है ये सारे विचारों का खेल है। ब्रह्म भी आपको काम करना विचार भेजता है और आपका मन बुद्धि भी विचार ही ग्रह करता है। अब वहां पे है किस स्तर का ब्रह्मा आ गया। पहले तो सुष्म नाड़ी एक्टिव हुआ। आपको खुद पता चलना चाहिए। ऐसे सुष्म नाड़ी एक्टिव है। अभी मेरा सुषुमना नाड़ी एक्टिव है। ये धैर्य जो है ना धैर्य की वक्त सुष्मना नाड़ी एक्टिव होता है। इसलिए तो धैर्य में जाना बोलते हैं हम। क्योंकि उस दायरे में गए सुष्म नाड़ी एक्टिव हुआ तो आप ब्रह्म से कनेक्ट हुए जी अब आगे पड़े आपका सहजता है ना ब्रह्म के साथ हो गए अब सुष्म नाड़ी एक्टिव हो आप अगले चेतन आकाश में ना हो तब भी जिस आकाश में उस आकाश में डायरेक्ट ब्रह्म की आ गई ना जी भला ऊपर की ना आई नीचे के आकर भी तो ब्रह्म की आ गई ना
अखिलेश भैया : जी जी जी इसको अंतर समझ पा रहे अब मतलब आप बोल रहे हैं कि जो ब्रह्म की नाड़ी है और हमारी जो खुद की नाड़ी है वो दोनों कनेक्टेड हो गए हैं एक दूसरे से।
प्रभु जी : हां वो सुषुमना नाड़ी ब्रह्म नाड़ी बोलो ना। हां जो जो सुषुमना नाड़ी है वही ब्रह्म नाड़ी है। एक्चुअली में नॉर्मली तो हम लोग जैसे जी रहे हैं जी रहे हैं 3 डी में पर जब हम धैर्य में जाएंगे ध्यान में जाएंगे तो वो सुषुमना नाड़ी जो हमारी एक्टिव हो जाती है तो वो एक्चुअली में ब्रह्म से ही कनेक्टेड है वो। हां वहां आपकी बातें करना आपकी विश करना काम के लिए संकल्प करना सुष्मना नाड़ी एक्टिव होते समय संकल्प करना है हमको इसको भी करना है इसको हम ये भी कह सकते हैं कि सुषमना नाड़ी हमारी एक्टिव हो रही है तो जो हमारा कॉन्शियसनेस है जो हमारा चेतना का स्तर है वो और ऊपर उठ गया है हां वो तो ऊपर उठने के बाद ही सुषुमना नाड़ी एक्टिव होगा और एक बात बता रहा हूं जब आपको पता चला सुषुमना नाड़ी एक्टिव है तब आप ब्रह्मांड से मांग सकते हो करवा सकते हो ब्रह्मांड से काम ओके बात समझो इधर अच्छा अच्छा जैसे यहां पे बोलते हैं ना बहुत शक्तिशाली है वो ऐसा है वो ऐसा है आप हर बार संकल्प करके नहीं होने वाला आपको जब भी कुछ संकल्प करना है पहले देखो सूक्ष्म नाड़ी एक्टिव है आप अब संकल्प करो हम बिल्कुल बिल्कुल
अखिलेश भैया : तो एक्चुअली में फिर थॉट जो होंगे विचार होंगे वो उसी के हिसाब से फिर आने स्टार्ट हो जाएंगे।
प्रभु जी : हां इंगला पीड़ा में तो आपकी मन बुद्धि है।
अखिलेश भैया : जी जी जी जी बॉडी का भी एक पूरा रूप नहीं यूज़ कर पाते हो इंगला पीड़ा में है ना बॉडी का जितना भी अपना क्षमता होता है लेकिन सुषुमना
प्रभु जी : नाड़ी में आप ब्रह्म से कनेक्ट होता है और वहां से मांग सकते हो संकल्प कर सकते हो और जो संकल्प करते हैं बोलते है ना बड़ा-बड़ा संकल्प करके इनसे संकल्प किया और एक हो गया अब वो सुष्म नाड़ी एक्टिव के समय किया संकल्प उसका पूरा होगा अब वो तो फिर ज्ञानी समझ के फिर शिव नाड़ी नहीं देख के संकल्प कर रहा है। वो फिर खुद को आगे करेगा।
अखिलेश भैया : हम हम बिल्कुल बिल्कुल मैं समझ गया। कुछ समझ में आया? जी जी समझ आ गया।
प्रभु जी : जीवन में यही सुष्म नाड़ी एक्टिव करो और सुष्म नाड़ी एक्टिव करके जीवन में क्या चाहते हैं उसी तरह से चलो। इतना आसान है भैया।
अखिलेश भैया : वही तभी एक्टिव होंगी जब हम धैर्य में जाएंगे, ध्यान में जाएंगे। बस वो तो भैया जी आपका तो बहुत बार एक्टिव
प्रभु जी : है। आप उसको पकड़ो। मैं वही पकड़ने का जरिया दे रहा हूं। अभी अभी अगर मैं बात कर रहा हूं आपसे ना तो मेरे दोनों के दोनों जो है इंगला पिंगला जो नारी सुषमा नारी एक्टिव हो रखी है मेरी।
अखिलेश भैया : हां दोनों दोनों नाक चल रही है इस समय मेरी जब मैं बात कर रहा हूं आपसे।
प्रभु जी : हां ये अनुभव के साथ आपको डिसीजन लेना, काम करना, संकल्प लेना, मुझे ये चाहिए करना ये सारी चीज एक टाइम करो। जी जी जी जिस समय मेरी ये एक्टिव होगी सुष्मना नाड़ी तभी मुझे कोई भी डिसीजन लेने हैं कोई भी कार्य करना है कोई भी अपना संकल्प करना है वो इसी समय करना है बस इस समय काम करेगा और दूसरी समय अब उसको क्योंकि मन बुद्धि में है वो जी तो सारा फोटो सुनता है देखने ना कभी भी अब क्या कहा पे करने से आपको खुद पता चलेगा
अखिलेश भैया : जी जी जी और वो प्रकृति स्वरूप ऑटोमेटिकली वो नहीं आप चाहकर भी उसको फिर अभी नहीं इंगला पीड़ा चल रहा है तो आप फिर उसको साधना
प्रभु जी : करके आप फिर ला सकते हो उसको सुष्म एक्टिव कर सकते हो क्योंकि इतने दश में तो हमारे टीम गीता की सारे सत्संगी आ चुके हैं।
अखिलेश भैया : जी जी जी समझे अगर देख लेना भैया इस अवस्था में जाके मांग के एक बार आपको अजूब लगेगा भैया नहीं नहीं नहीं बिल्कुल सही बोल रहे हो मैं करूंगा इसमें प्रैक्टिस करूंगा मैं इसकी आपने बहुत अच्छा बताया मुझे अब मेरे ध्यान में रहेगा मैं इसका अनुभव भी आपसे
प्रभु जी : साझा करूंगा ठीक है भैया प्रणाम प्रभु जी सबको प्रणाम कि सुष्मुना नाड़ी जब एक्टिव होती है जैसे मैं मान लूं मुझे अभी एक करोड़ चाहिए पैसा है ना अब मेरा सुष्मना नाड़ी एक्टिव है तो मैं क्या चाहूंगा सबसे पहले तो मैं एक करोड़ मंगाऊंगा जी है ना जब आपकी सुष्मुना नाड़ी एक्टिव होगी आपको एक करोड़ तो सुष्मना नाड़ी ना चलने टाइम आपको नीड थी ना अब सुषुमना नाड़ी चलने समय अगर वो तो एक करोड़ ब्रह्म स्वरूप आपको नहीं नीडेड है तो आपका सूचना नाड़ी एक्टिव होने के समय भूल जाते हो आप
अखिलेश भैया : हां जी जी सही बात ही नहीं देगा वो 10 परमात्मा
प्रभु जी : जी क्यों एक करोड़ क्यों देगा वो बैठे-बैठाए हमें बिना कुछ करे तो ब्रह्मांड तो वही करेगा वही करेगा जो सही होगा उसके हिसाब [गला साफ़ करने की आवाज़] से हां और इसमें गौर क्या करना जब सुषमा नाड़ी एक्टिव है तो फिर हमारे मन बुद्धि से जो मांगने चाह रहे थे वो मांग भी नहीं सकते आप जी ये बात समझो बिल्कुल बिल्कुल आपकी भाव उस टाइम ऐसा आ जाएगा कि जो आपको मांगना है जी मतलब समझो आप अपने अधीन में नहीं होते हो ब्रह्म के अधीन में होते हो
अखिलेश भैया : ब्रह्म के अधीन होते हैं हां ये वो जो चाहेगा हम वही मांगेंगे भाई उसके विचार तो हम पकड़ेंगे हमारे विचार उसके
प्रभु जी : विचार भेजेगा वही तो हम वो करेंगे भ्रम के विचारों को ही तो हम पकड़ेंगे हम यही हां अमिता माता भी बोलना इसमें क्या-क्या समझ आया अलग से रमा माता के खत्म होने के बाद पहले रमा माता मेरा खत्म हो गया प्रभु जी मेरा खत्म हो गया जी अमिता माता जी बताइए तो क्या ध्यान में
अमिता माता जी : आया आपके प्रभु जी ने जो बताया वो बहुत क्लियर ये हुआ कि यहां जब यह चलने लगती है ना सुषुमना तो उस समय हमारा चाहा हुआ या मैंने कुछ भी सोचा है कि अब जब चलने लगेगी तो ये मांगेंगे ऐसा कुछ नहीं होता कि वहां मन बुद्धि बंद हो जाती है क्योंकि ब्रह्म के ब्रह्म का ही विचार आएगा और उसी ढंग से हम एक्ट भी करेंगे क्योंकि वह सबके लिए होगा ना हमारा अपना पर्सनल स्वार्थ वार्थ वहां और कुछ नहीं होगा यह रुपए भी या कुछ भी हम क्यों मांगेंगे अपने उसके तो वह [नाक से की जाने वाली आवाज़] चीज वहां मिट ही जाएगी क्योंकि वहां हम तो रहेंगे नहीं ना। तो वही प्रभु जी बता रहे हैं कि फिर वहां वो ब्रह्म ही का विचार रहेगा। उसी हिसाब से ही काम होगा। मेरा सोचा हुआ नहीं होगा। इसलिए हम यह ना सोचे कि हम जो चाह रहे हैं वो मांग लेंगे। नहीं वहां पर वो वाली आपका चाहा हुआ निकलेगा ही। आपको याद ही नहीं आएगा। भुला देगा वह। और जो दूसरा क्योंकि वह भी एक विचार ही भेजेगा ना तो वह ब्रह्म का ही विचार रहेगा। यही समझ में आया भैया और बाकी स्वास का तो बहुत अच्छी समझ में आ गया कि हां जब इरा और पिंगला स्वास बराबरी से दोनों वो हो तो बीच में एक नाड़ी जैसा सुषुमना का वो रहता है जिसको देखते रह जब तक फंसी रहती है कहीं रुका है तो जो आप कह रहे थे यह वाले इस ढंग से सांस वो करके उसको खोलेंगे और फिर जब करेंगे तो वो बन बन जाएगा एक तार एक तार जैसा सब पूरा हो जाता है जो कि फिर सीधे आज्ञा चक्र और फिर सहस्त्रार्थ ऐसा करके जाके फिर सब का वाइब्रेशन फिर पता चलने लगता है। ठीक है ना भैया?
प्रभु जी : जी जी माता जी आपके ध्यान हां ठीक है। और सुनो अब ये सुषुना नाड़ी के विषय में था। ठीक है और एक और ऐसे ही सुषुना नाड़ी जैसे और एक बात बताता हूं मैं आप लोगों को जैसे [नाक से की जाने वाली आवाज़] हम लोग को कहीं जाना है। है ना? हम लोग कोई यात्रा तय कर रहे हैं अथवा कोई काम में जा रहे हैं अथवा किधर जाके हमारा काम सक्सेस हो ऐसा अगर हम चाहते हैं प्रकृति अगर उस तरीका से मैनेज कर दे अगर हम लोग उसको चाह रहे हैं और प्रकृति उसको मैनेज करने का कुछ प्रकृति का साथ ऑप्शन है तो करेगी अब उसके लिए सूक्ष्म नाड़ी तो एक हो गया और दूसरा भी है वो है अंत आकाश क्लीन करना जो भी योगी लोग होते हैं वो निकलने से पहले क्या करते हैं अंत आकाश क्लीन करते हैं। राजेश भैया आप पकड़ पा रहे हो? इसको समझाओ तो एक बार। आपको बताया था ना मैंने। हां जी। हां जी ये पता है मुझे।
राजेश भैया : तो भैया जी जो बताना चाह रहे हैं ना अंत आकाश क्लीन। अंतराकाश क्लीन मतलब क्या होता है ना कि जहां पर भी जा रहे हैं ना तो उससे वो कुछ भी अपने मन के भीतर रहते नहीं रखते नहीं है और होने वाली चीज को भी पूरा क्लीन करके चलते हैं क्योंकि वो जो मन के ऊपर अगर बैठा रहा तो वो फिर होता नहीं है और इसीलिए वो अंतकाश क्लीन और अंतराश क्लीन की बात मतलब क्या है ध्यान करेंगे ध्यान में जाएंगे और वो जो भीतर है ना कुछ वो अपने मन है विचार है जो कुछ भी चल रहा है वो उसी को क्लीन करेंगे तो वो जब सच में यह करते हैं ना तो वो जो काला काला काला सब सब मन में जो कुछ चल रहा है ना वो सब हट जाता है वो हट के एकदम फ्रेश होके वो निकलते हैं तो वो निकलने से क्या होता है ना उन वो अंतराकाश क्लीन कर दिए वो ब्रह्म के साथ एकाकार हो गए और तो वो इसी प्रकार से वो प्राकृतिक स्वरूप चीजें भी वैसे ही बनती जाती है और यह वाली टेक्निक है ना वो जैसे भैया जी ने बोला ना योगियों को पता रहते हैं। इसीलिए वह कुछ भी काम करने जाते हैं। किधर यात्रा पे जाते हैं या कुछ भी करने जाते हैं ना ध्यान करके अंतकाश क्लीन करके जाते हैं। और ये वाली चीज बहुत मतलब ये सूक्ष्म चीज है एक्चुअली और तो भैया जी तो ध्यान करते रहते हैं। लेकिन मैंने देखा है कि ये हमारे भीतर जो अंतराकाश में बनता है ना ग्रंथियां तो वो अच्छे की भी बनती है और बुरे की भी बनती है। ऐसा नहीं कि बुरी घटनाएं हुई उसकी हुई कि बुरा डर लगा या फिर कुछ तकलीफ हुआ उसका ये दुख का भी हुआ। आनंद की भी होती है। ग्रंथि है ना वो एक स्मृति है। ग्रंथि मतलब एक गांठ है। स्मृति है। बैठ गए विचार में तो अच्छी की भी होती है, बुरी की भी होती है। दोनों को भी हटाना है। वो जो धारण शरीर में बैठी है उसको हटाना है। वो हट जाएंगी तो हम ब्रह्म स्वरूप हो जाएंगे। तो वह करके ही वह सब चलते हैं। यह इस प्रकार होता है क्लीनिंग करके अंतकाश क्लीन करके जो बोलते हैं वैद जी ने जो बोला फिर वो हर काम में चलते हैं और उनको सक्सेस मिलता है। ये इस प्रकार से एक सूत्र बताया उन्होंने अभी। दूसरी बात सुनिए।
प्रभु जी : अब होता क्या है? सबसे पहले तो लोग उस दशा में नहीं पहुंच सकते जिस दशा में खुद सुष्मना नाड़ी एक्टिव करें और खुद अंतरराकाश को क्लीन करें और जो उस दशा में पहुंच गया है अब वो कर सकता है पहले तो दशा में नहीं पहुंच सकता और जो दशा में पहुंचे हैं अब उसके पास आ गया है शक्ति क्योंकि ये मैंने पहले नहीं बताया बहुत बहुत सारे शक्तियां है जो अपने जीवन में यूज कर सकते हैं। अब जिसका अंतकाश नहीं खुला है और जो सूक्ष्म नाड़ी डायरेक्ट नहीं पकड़ेगा अगर उसको ये शक्ति के बारे में बताया जाए तो वो ये शक्ति के पीछे जाएगा। अब वो लगेगा मैं सूक्ष्म नाड़ी एक्टिव करूं। मैं अंतकाश क्लीन कर वो नहीं होगा। पहले दशा में पहुंचना पड़ता है और दशा के बाद तब होता है। अब यह तो अभी मैं बता रहा हूं इसलिए आप लोग को पता चला और बहुत सारे संत ने देखा कि बहुत सारे संत ने बताते नहीं है ये बात है ना लेकिन उसने एक दो बार बता और वो गीता और उसमें बहुत सारे चीज में भी नहीं लिखे हैं ये चीज और ऐसा चीज अपने गुटिया में जाते हैं गुरु शिष्य एकदम नजदीक होते हैं तो उन लोग को बताते हैं यह बात है ना और ये सारे चीज शक्तियां जितने भी है ये दोनों में ही निहित है। एक अंतराकाश क्लीन एक सुष्मना नाड़ी इसी में ही आपका कुंडलिनी का जितना शक्ति कुंडलिनी का जितना पावर सब कुछ इसी के अंदर है। और कुंडलिनी भी इसी के अंदर घूमती है। और पहले उस दशा को पहुंचना है। दशा क्या है? मेरा अंतर आकाश पता है कि नहीं? मतलब खुद का अंतकाश को जाने हो कि नहीं हो और सुष्मना नाड़ी एक्टिक का अपने खुद को महसूस किया है कि नहीं है अगर ये दोनों महसूस किया है तब उसके पास ये शक्तियां होती है समझ में आया भैया जी भैया जी मुझे एकदम समझ में आया हां अब और दूसरी बात सुनो क्या होता है जिसको अंतिम सत्य पता है उसके साथ का आपको जीना पड़ेगा तब आप अंतिम सत्य तक की जीवन शैली में जीते हो अगर नहीं सत्संग में चल रहे हो ऐसे कर रहे हो बातें जैसे चल रहा है सब लोग का चलता है ना ये आध्यात्म में मैं भी आध्यात्म में हूं मेरा गुरु है मेरा ये है ये है मैं उनको मानता हूं मैं ये हूं तब तक भी उनको सारे दशा नहीं पता चलता है और जिसको अंतिम सत्य पता है या अंतिम सत्य के साथ कोई गया है तो उन लोग उस तरफ से लेके जा सकते हैं। नहीं तो अंतिम सत्य पता चलना इतना आसान नहीं है जितना आसान हमारी मन बुद्धि जानता है जितना अभी सब लोग को लगता है ना मैं जानता हूं मुझे पता है सब ऊर्जा स्वरूप है आत्मा है वो बोलने के लिए बोल रहे है ऊर्जा आई मेरी कुंडलिनी मुझे सूक्ष्म नाड़ी का एक्टिव हुआ अंतर आकाश का ये भी पूरा अंतिम सत्य नहीं है अंतिम सत्य जानने के लिए अंतिम सत्य के साथ जीना पड़ता है अभी सबके साथ तो यह होता नहीं है या अंतिम सत्य के साथ जो पहुंचे हैं उसके साथ जीना नहीं मिला तो अंतिम सत्य के साथ जिसके साथ जी रहे हैं उनके साथ की स्वामी देवी आपको उस तरफ ले जा सकता है ये बहुत बड़ी बात है भैया इसीलिए गुरु शिष्य परंपरा इसीलिए वो संस्कृत का एकदम अलग से भाषा इसीलिए अध्यात्म का अलग से रास्ता ये सारे चीज बनाया इसलिए गया है नहीं तो अंतिम सत्य तक नहीं पहुंच सकते जब तक जो अंतिम सत्य में पहुंच भरोसा है उसके साथ आपका दिनचर्या ना हो लेकिन प्रभु जी प्रभु जी जैसे राजेश और सुभांगी आपके साथ सानिध्य में है हां आप लोग उनके साथ जीकर भी पता हम उनके साथ उनके सानिध्य में है तो हम जान सकते हैं जान सकते हैं क्योंकि उन लोग तो अंतिम सत्य के साथ जिए हैं ना साथ में जी जी जी या तो आपको डायरेक्ट अंतिम सत्य के साथ इसलिए या तो गुरु गुरु भी क्या है कि मान के पुष्ट गुरु एक दशा है आपको पहुंचाता है आपका दिनचर्या असली करेगा आपको मनस दशा ठीक करेगा आपको हर बात हर घटना की आपको बेस्ट जस्टिफाई आपको देगा ये सारे चीज भी खेल है जी प्रभु जी तो कहते हैं कि सतपुरुष के या गुरु के सानिध्य में रहने से भी बहुत कृपा आती है मिलती है इसलिए सानिध्य में रहना पड़ता है चाहे चाहे गुरु या सत्पुरुष कितना भी बुरा भरा शिष्य को कहे वो सहना पड़ता है। तब जाके गुरु की कृपा मिलती है। वाह भाई वाह राजेश जी आपके तो मुझे समझ में आ रहा है कुछ बहुत दिन हां प्रभु जी ये तो बहुत जरूरी बात बताई लोग चलते हैं करोड़ों मिलते हैं गुरु 810 अब कैसे बैलेंस होगा नहीं ऐसा चल रहा है ऐसा ही सत्पुरुष भी तो सत्पुरुष होना चाहिए ना सही तो होने के लिए आपके जैसा आपके जैसा हां तो वो पहचान सुनो माता जी आपको यहां सत्संग में सालों से आ रहे हो तो आपको लगता है अरे बाप से मुझे देखा कौन बोलेगा सत्पुरुष डेफिनेशन है वो तो भाई सत्पुरुष का भी कोई डेफिनेशन होता है 20:0120 minutes, 1 second[गला साफ़ करने की आवाज़]
राजेश भैया : प्रभु जी तो हो जाती है पहचान ही पहचानने के लिए भी कैपेबल चाहिए ना माता जी जी जी जी
प्रभु जी : पहचान तो होती है पहचान कैसे होती है ये आप लोग को लगता है कि मैं ये हूं राजेश बैठे मेरे साथ जी रहे हैं तो उसको ये सारे चीज क्या मेरे साथ क्या राज शिवांगी ओनली जी रहे हैं बहुत सारे लोग जी रहे हैं ये सबको पता है प्रभु जी सारे प्रभु जी वो सारे गुण जो आपके अंदर है ना वो हमें पहले अपने अंदर उतारने पड़ेंगे पहले कैलबर होना पड़ेगा कि पहचानने के लिए जी जैसे ए लिखा है ये ए लिखा है बोलने के लिए पहले आपको ये तो पता होना चाहिए ना जी अब यहां यहां पे तो आपको ये ऐसा है बोल के आपको बता दिया गया इसलिए ये है। अब उसके ऐसे दोनों ए ऐसा सीधा सीधा लेता है। अब लाइन मोड़ दिया दूसरा ए जैसा लगा। जी वो भी ए होता है। समझ रहे हो बात? अब समझ बढ़ानी पड़ेगी। हां जानने की चाहिए। होश और समझ बढ़ानी पड़ेगी हमें। अभी जो मैंने बोला हूं यह बहुत बड़ी बात है।